मां भगवती की आराधना


दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रत्येक नवरात्रि पर्व पर किया जाता है। कुछ भक्तगण प्रतिदिन भी दुर्गा सप्तशती का पाठ करके मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ करने का शास्त्रोक्त विधान है जिसमें महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती की पूजन के साथ पाठ किया जाता है। प्रथम चरित्र में महाकाली, मध्यम चरित्र में माता महालक्ष्मी तथा उत्तर चरित्र में माता सरस्वती की पूजन एवं ध्यान करते हुए कुल 13 अध्याय का पाठ करते हैं। इसके वहले शुद्धिकरण बाद में शापोद्धार तथा पश्चात देवी कवच, अर्गला कवच तथा कीलक के पाठ के साथ ही न्यास ध्यान एवं नवार्णजप करने के बाद ही अध्याय का पाठ किया जाता है। 13 अध्याय पर्ण होने के बाद तीन रहस्य के मूर्ति रहस्य के पश्चात् क्षमा प्रार्थना का विधान है, जिन्हें दुर्गा सप्तशती के प्रारंभ में ही वर्णित किया गया हैहमारे कहने का आशय यह है कि 13 अध्याय की इस उत्तमग्रथ में माता की आराधना द्वारा जीवन की समस्याओं का समाधान करने का माता से अनुरोध किया गया है। 13 अध्याय का उल्लेख में लिखित मंत्र एवं स्तोत्र में जीवन की समस्या का निवारण प्रदाय किया गया है। यह केवल मां भगवती कृपा और जीवन पथ में आने वाली समस्याओ के निदान के लिए पाठकों के लाभार्थ प्रदाय किया जा रहा है इसमें कोई परिवर्तन संशोधन और परिवर्द्धन विद्वान पाठक करना चाहें तो कर सकते हैं तथा किसी प्रकार की कोई त्रुटीपूर्ण उल्लेख होने की स्थिति में एक अबोध भक्त स्वीकार करते हुए क्षमा करेंगे। निम्नानुसार अध्याय- वार विवरण प्रस्तुत है.



  1. प्रथम अध्याय- 104/मंत्र हर प्रकार की चिंता मिटाने के लिए। .

  2. द्वितीय अध्याय-69/मंत्र मुकदमा, झगड़ा आदि में विजय पाने के लिए। .

  3. तृतीय अध्याय- 44/मंत्र शत्रु से छटकारा पाने के लिए। .

  4. चतुर्थ अध्याय- 42/मंत्र भक्ति, शक्ति तथा धनलाभ के लिए। .

  5. पंचम अध्याय- 129/मंत्र भक्ति, शक्ति तथा ज्ञान प्राप्त करने के लिए। .

  6. षष्ठम अध्याय-24/मंत्र डर, शंकाएं, बाधाएं दूर करने के लिए .

  7. सप्तम अध्याय- 27/मंत्र हरमनोकामना की पूर्ति के लिए .

  8. अष्टम अध्याय- 63/मंत्र सम्मानित व्यक्तित्व के मिलाप एवं वशीकरण के लिए .

  9. नवम अध्याय- 41/मंत्र गुमशुदा की तलाश, हर प्रकार की कामना एवं संतान पुत्र सुख के लिए

  10.  दशम अध्याय- 32/मंत्र गुमशुदा की तलाश हर प्रकार की कामना एवं (पुत्र) संतान सुख के लिए .

  11. एकादश अध्याय-55/मंत्र व्यापार, सुख, संपत्ति की प्राप्ति के लिए

  12. द्वादश अध्याय- 41/मंत्र मान सम्मान तथा समृद्धि एवं लाभ प्राप्ति के लिए .

  13. त्रयोदश अध्याय- 29/मंत्र भक्ति प्राप्त करने के लिए 


इस प्रकार दुर्गा सप्तशती अंतर्गत कुल 700 मंत्र है। इन सभी का उपरोक्तानसार अध्यायवार मंत्रों का फल निरुपण किया गया है। इसी कारण इसे सप्तशती कहा जाता है। वर्ष में चार नवरात्रि चैत्र, आषाढ, आश्विन, माघ में आती है जिसमें आषाढ़ एवं माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है