यह संसार विभिन्न तरह के प्राणियों से भरा है। संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में एक अलग व्यक्तित्व है दूसरे व्यक्ति के व्यक्तित्व का कहीं कोई संबंध नहीं है। यूँ तो हम स्वभाव व गुणों के आधार पर लोगों का वर्गीकरण कर सकते हैं गोया कि सरल स्वभाव के व्यक्ति, संत-साधु स्वभाव, क्रोधी या उग्र व्यक्ति या चालाक व्यक्ति आदि। किन्तु यह अत्यन्त स्थूल वर्गीकरण है। साधु-संत या सरल स्वभाव वाले भी एक जैसे नहीं हो सकते हैं, उनमें कुछ वाचाल, विद्वान, मौनी अथवा ज्ञानी हो सकते हैं। सच तो यह है कि मानवीय स्वभाव या कि मानवीय मनोविज्ञान इतना क्लिष्ट है कि उसे अधिकांशतः व्यक्ति समझ नहीं सकता। व्यक्ति के मानस को बूझना एक असंभव सा कार्य है। हाँ कुछ हद तक आप उसे पहचान सकते हैं किंतु शत-प्रतिशत नहींकभी-कभी यह भी महसूस किया होगा कि किसी व्यक्ति विशेष के बारे में आपकी क्या धारणा थी और उस धारणा पर कितनी मजबूती से आप टिके हुए थे। यकायक कुछ ऐसी घटना या बात हुई कि आपकी धारणा छिन्न-भिन्न हो गई व्यक्ति खुद अपने-आप को भी आजीवन कहाँ पहचान पाता है? अगर हम ऐसा समझ रहे हैं कि स्वयं को भी हम भली-प्रकार समझ रहे हैं तो भारी भ्रम में जी रहे हैं और यही भ्रम या भ्रांति हमें यदा-कदा कष्ट देती रहती है। कुछ लोग तो सब अति कर जाते हैं जब वे दूसरे किसी व्यक्ति को भरपूर समझने का दावा प्रस्तुत कर देते हैं। संभवतः कुछ हद तक उनका यह दावा उचित भी हो किंतु पूर्णतः उचित नहीं है क्योंकि यहीं धोखा खा जाने की संभावना बनती हैदरअसल कोई व्यक्ति किसी को धोखा नहीं देता है। आज तक किसी ने किसी को धोखा दिया ही नहीं है। टूटती है आपकी धारणा जो आपने अनावश्यक ही मजबूत कर ली थी जैसे कि आप किसी मित्र को काफी रुपया उधार दे चुके हैं क्योंकि आपको उस पर पूर्ण विश्वास है कि समय पर वह धन लौटा देगा। आप पाते हैं कि मित्र का मन बदल गया है और वह आपका धन डकार गया। यहां आप कहते हैं कि आपके साथ धोखा हआ। लेकिन वह धोखे वाली बात झूठ है नितांत। आपने किस आधार पर उस मित्र पर अति विश्वास व्यक्त किया? अवश्य ही आपने किसी एक बात पर धारणा निर्मित की होगी कि वह व्यक्ति बहुत ईमानदार है- क्योंकि उसने आपकी छोटी मोटी रकम लौटा दी हो। विचार की जिये कि आप कहीं एकांत में जा रहे हैं। आगे एक बड़ा खड्डा है जो घास-फूस, पत्तों से पटा पड़ा है आप विश्वास से चलते जा रहे हैं कि आगे समतल मार्ग है और गड्ढे में पाँव पड़ते ही आप उसमें धड़ाम से गिर पड़ते हैं। आपकी धारणा टूटी कि आगे समतल मार्ग होगा। उस गड्ढे ने आपको दगा नहीं दिया
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